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Patna News: IGIMS में आयुष्मान योजना के क्लेम पर सवाल, 45 लाख की गड़बड़ी के बाद निगरानी बढ़ी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | IGIMS पटना में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े क्लेम में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद जांच और निगरानी व्यवस्था कड़ी की गई है।

पटना, 30 सितंबर, आलम की खबर: पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े क्लेम में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था कड़ी कर दी है। शुरुआती जांच में करीब 45 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी सामने आने और चार आउटसोर्स कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब आयुष्मान योजना से जुड़े क्लेम की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मामला मरीजों के रिकॉर्ड और इलाज से जुड़े दावों में कथित हेरफेर से जुड़ा है।

मरीज की शिकायत से सामने आया मामला

मामले की शुरुआत एक मरीज की शिकायत से हुई। शिकायत में इलाज और आयुष्मान योजना के इस्तेमाल से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाया गया था। इसके बाद संस्थान स्तर पर जांच शुरू की गई। जांच में ऐसे मामलों की जानकारी सामने आई, जिनमें मरीजों को आयुष्मान योजना के लाभार्थी के बजाय कैश बेसिस पर दर्ज किए जाने और उनसे संबंधित रकम के हिसाब में अनियमितता का आरोप है।

जांच में आयुष्मान योजना से जुड़े रिकॉर्ड, मरीजों की भर्ती और डिस्चार्ज से संबंधित जानकारी तथा क्लेम प्रक्रिया की पड़ताल की गई। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर चार आउटसोर्स कर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

चार आउटसोर्स कर्मियों पर प्राथमिकी

IGIMS प्रशासन की शिकायत पर शास्त्रीनगर थाने में चार आउटसोर्स कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में अमरजीत राज, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक कुमार के नाम सामने आए हैं। इन कर्मियों पर आयुष्मान योजना से जुड़े मरीजों के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और कैश बेसिस पर मरीजों को दर्ज कर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप लगाए गए हैं।

जांच में कथित तौर पर फर्जी क्लेम, मेडिकल बिल में गड़बड़ी, दस्तावेजों के गलत इस्तेमाल और मरीजों के रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे बिंदुओं की भी पड़ताल की जा रही है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

45 लाख की राशि का मामला

मामले की शुरुआती जांच में करीब 45 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी की ओर से कथित तौर पर 45 लाख रुपये संस्थान को वापस किए गए हैं। हालांकि, पूरे मामले में अंतिम वित्तीय नुकसान कितना हुआ, इसका आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

यही वजह है कि अब सिर्फ सामने आए मामलों तक जांच सीमित नहीं रखी जा रही है। आयुष्मान योजना के पुराने रिकॉर्ड और क्लेम की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।

13.89 करोड़ रुपये का अलग राजस्व नुकसान भी चर्चा में

IGIMS में आयुष्मान योजना से संबंधित एक अलग वित्तीय मुद्दे पर भी पहले से ऑडिट आपत्ति सामने आ चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार, आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को दी गई सेवाओं के समय पर रिइम्बर्समेंट क्लेम नहीं किए जाने से करीब 13.89 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का मामला सामने आया था। यह आंकड़ा मौजूदा 45 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी से अलग है।

इस वजह से अस्पताल में आयुष्मान योजना की पूरी प्रक्रिया की निगरानी और रिकॉर्ड की जांच का महत्व बढ़ गया है।

अब हर क्लेम की निगरानी पर जोर

मामला सामने आने के बाद IGIMS प्रबंधन ने आयुष्मान योजना के क्लेम की निगरानी मजबूत करने की व्यवस्था की है। रिपोर्टों के अनुसार, अब दावों और मरीजों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच पर सीधे स्तर पर निगरानी रखने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी मरीज के नाम पर गलत क्लेम तो नहीं बनाया गया, भर्ती और डिस्चार्ज का रिकॉर्ड वास्तविक है या नहीं और योजना के तहत भुगतान से जुड़े दस्तावेज सही हैं या नहीं।

आगे और रिकॉर्ड की जांच संभव

चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी और संस्थान स्तर पर निगरानी बढ़ाए जाने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। पुलिस और संस्थान की जांच में सामने आने वाले रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितता किन मामलों तक सीमित थी और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामले में आरोपों की जांच जारी है। अंतिम जिम्मेदारी और वित्तीय नुकसान का वास्तविक आंकड़ा जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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